ख़ामोशी से चल के मेरे पास आती है....
अपनी कहानी चुपके से मुझे सुनाती है..
हर रोज़ इक नयी दास्ताँ होती है उसकी.....
इक पल आवाज़ दे के बुलाती है मुझे..
फिर गुमसुम सी हो के कुछ दूर चली जाती है..
कभी कहे आसमान छूना है मुझे..
कभी रात के सन्नाटे में चुप सी हो जाती है...
कभी लगे रंग बिखेरती तितली जैसी...
कभी बन जाये उलझी सी पहेली ऐसी..
जिसका हर कदम एहसास बन जाये...
जिसका बीत जाना याद बन जाये..
वो अनजान सी कुछ अपनी सी मेरी 'ज़िन्दगी' कहलाती है।
अपनी कहानी चुपके से मुझे सुनाती है..
हर रोज़ इक नयी दास्ताँ होती है उसकी.....
इक पल आवाज़ दे के बुलाती है मुझे..
फिर गुमसुम सी हो के कुछ दूर चली जाती है..
कभी कहे आसमान छूना है मुझे..
कभी रात के सन्नाटे में चुप सी हो जाती है...
कभी लगे रंग बिखेरती तितली जैसी...
कभी बन जाये उलझी सी पहेली ऐसी..
जिसका हर कदम एहसास बन जाये...
जिसका बीत जाना याद बन जाये..
वो अनजान सी कुछ अपनी सी मेरी 'ज़िन्दगी' कहलाती है।
No comments:
Post a Comment